बिना सिफारिश और सुविधा शुल्क के हो रहे कार्य, महाविद्यालयों को मिली प्रशासनिक जटिलताओं से मुक्ति
जौनपुर।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में इन दिनों एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। वर्तमान कुलपति प्रो. वंदना सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने अपनी पुरानी ‘फाइल संस्कृति’ को पूरी तरह से त्याग कर एक पारदर्शी, जवाबदेह और सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली को अपना लिया है।अब विश्वविद्यालय से संबद्ध जौनपुर और गाजीपुर के 586 महाविद्यालयों के लिए निर्णय प्रक्रिया न केवल तेज हुई है, बल्कि पूरी तरह से समान और निष्पक्ष भी हो गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के जानकारों का मानना है कि प्रो. वंदना सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद सबसे पहले फाइलों के निस्तारण में व्याप्त अनिश्चितता को समाप्त किया। उनके कुशल निर्देशन में अब राजनीतिक प्रभाव या किसी अन्य दबाव के बजाय ‘मेरिट’ और ‘नियम’ को प्राथमिकता दी जा रही है।कुलपति की कार्यशैली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नेतृत्व दृढ़निश्चयी हो, तो बिना किसी ‘सिफारिश’ या ‘सुविधा शुल्क’ के भी तंत्र को सुचारू रूप से चलाया जा सकता है।कुलपति की इस सक्रियता का सबसे सुखद परिणाम रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिला है।अनुमोदन और चयन की प्रक्रिया को बाधा मुक्त बनाने के फलस्वरूप लगभग 1500 नए शिक्षकों को नियुक्ति मिली है। एनओसी, सीट वृद्धि, और नए संकायों की स्वीकृति जैसे महत्वपूर्ण मामले, जो पहले महीनों तक लंबित रहते थे, अब एक निश्चित समय-सीमा के भीतर निस्तारित हो रहे हैं। प्रो. वंदना सिंह ने न केवल फाइलों पर हस्ताक्षर किए, बल्कि विश्वविद्यालय में कार्य के प्रति सम्मान और समयबद्धता की एक नई संस्कृति विकसित की है।पारदर्शिता की नई परिभाषा
आज विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों को यह विश्वास है कि उनकी उचित पत्रावली कुलपति कार्यालय में पहुंचते ही बिना किसी भेदभाव के स्वीकृत हो जाएगी। यह बदलाव न केवल विश्वविद्यालय की साख बढ़ा रहा है,बल्कि उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने में भी मील का पत्थर साबित हो रहा है।
महाविद्यालय प्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाएं…
“फाइल निस्तारण को लेकर पहले अनिश्चितता बनी रहती थी। इतनी सरल और स्पष्ट प्रक्रिया मैंने 1994 के बाद पहली बार देखी है।”
— डॉ. अब्दुल कादिर खां, प्राचार्य, मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज, जौनपुर
“शिक्षक चयन और अनुमोदन से जुड़े कार्य जो पहले लंबे समय तक अटके रहते थे, अब बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के समय पर पूरे हो रहे हैं।”
— डॉ. तबरेज आलम, प्राचार्य, फरीदुल हक मेमोरियल डिग्री कॉलेज, सबरहद,शाहगंज-जौनपुर
“अब फाइलों की स्थिति को लेकर भ्रम नहीं रहता। इससे शैक्षणिक सत्र की योजना बनाना आसान हो गया है।”
मुझे कालेज के कार्य के लिए कुलपति कार्यालय गए हुए कई साल बीत गए हैं जाना नहीं हुआ है।
— अशोक यादव, संचालक, किसान विधि महाविद्यालय एवं राम नगीना महाविद्यालय, गाजीपुर
“वर्षों बाद ऐसा महसूस हो रहा है कि सभी महाविद्यालयों के साथ समान व्यवहार किया जा रहा है और फाइल निस्तारण में कोई व्यवधान नहीं आ रहा है।”
—दिवाकर यादव
प्रबंधक,सुब्बा महाविद्यालय,गाजीपुर
कुलपति प्रोफेसर वंदना सिंह के आने के बाद से उनके कार्यालय का कार्य बहुत ही सरलता और सुगमता से हो रहा है।वह भी बिना किसी व्यवधान के।
आनंद प्रकाश सिंह यादव
राम नगीना शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय,पहाड़पुरकला और मां प्रेमा महिला महाविद्यालय बासूचक,गाज़ीपुर
कुलपति कार्यालय में यदि कार्य सही है तो किसी को ना तो फाइल के आने का इंतजार करने की जरूरत है और ना ही किसी एक भी चवन्नी देने की जरूरत है। एक से दो दिन में बिना सिफारिश के सभी कर हो जाते हैं।
डॉ.सत्येंद्र कुमार
प्रबंधक,
बहन मायावती महाविद्यालय, चौकड़ी,चौरा-गाज़ीपुर



