पश्चिमी यूरोप के इस्लामी विचारक डॉ. अकरम नदवी ने दिया मुसल्सलात-ए-हदीस का बयान
मदरसा कुल्लियत सालिहात में आयोजित हुई इल्मी मजलिस
खेतासराय (जौनपुर)।
जमदहां स्थित मदरसा कुल्लियत सालिहात में शुक्रवार को धार्मिक व तालीमी मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें पश्चिमी यूरोप के प्रमुख इस्लामी विचारक और ब्रिटेन में रहने वाले विद्वान डॉ. अकरम नदवी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने मुसल्सलात-ए-हदीस पर व्याख्यान देते हुए उलेमा और छात्रों को हदीस की परंपरा से अवगत कराया और उन्हें इजाजत-ए-हदीस प्रदान की। कार्यक्रम में क्षेत्र के उलेमा, हाफिज और क्षेत्र के लोगों ने शिरकत किया ।
कार्यक्रम की शुरुआत कारी फैजान द्वारा कुरआन की तिलावत से हुई। तत्पश्चात समारोह का आगाज़ हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना अब्दुल वहीद तथा संचालन फैजी नोमानी ने किया।
बतौर मुख्यातिथि सम्बोधित करते हुए भारतीय मूल के ब्रिटिश इस्लामिक विद्वान डॉ. अकरम नदवी ने मुसल्सलात-ए-हदीस की महत्ता, हदीस की सनद की निरंतरता और हदीस विद्वानों के ज्ञान व समर्पण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद की हदीसों की सुरक्षा और उनकी प्रमाणिक परंपरा मुस्लिम समाज की एक महत्वपूर्ण बौद्धिक धरोहर है।
डॉ. नदवी ने कहा कि कुरआन और हदीस ही मुसलमानों की असली पहचान हैं। इंसान की कामयाबी अल्लाह और उसके रसूल की बताई राह पर चलने में है।
उन्होंने छात्रों और विद्वानों से अपील की कि वे धार्मिक ज्ञान के साथ ईमानदारी, अनुशासन और अच्छे आचरण को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से लोग अपने समाज और परिवार से सीखते हैं, लेकिन सच्ची सफलता उसी को मिलती है जो ईश्वर और उसके रसूल की शिक्षाओं का पालन करता है। कुरआन की एक आयत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई वास्तव में ईश्वर से प्रेम करता है तो उसे ईश्वर और उसके रसूल का अनुसरण करना चाहिए।
सभा में अध्यक्षीय उद्बोधन में मौलाना अब्दुल वहीद कासमी ने डॉ. अकरम नदवी की शैक्षिक सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनके विचार नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। अंत में उनकी दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर मौलाना शहनवाज, हाफिज़ परवेज़, डॉ. जावेद, मौलाना आरिफ हलीमी, डॉ. शकील, मौलाना फहीम नदवी, मौलाना हारून नदवी, मौलाना अब्दुल्ला नदवी, हारून और महफूज शेख समेत भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।



